डब्ल्यूएचओ ने गेमिंग एडिक्शन को मानसिक स्वास्थ्य विकार के रूप में वर्गीकृत किया:


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गेमिंग डिसॉर्डर अर्थात इंटरनेट गेम से उत्पन्न विकार को मानसिक स्वास्थ्य की अवस्था के रूप में अपने इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (आईसीडी) में शामिल कर लिया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से प्रकाशित आईसीडी एक नियमावली है जिसे जिसे पिछले 10 वर्षों से अपडेट किया जा रहा है। इसमें जख्मों, बीमारियों और मौत के कारणों के करीब 55,000 यूनिक कोड हैं। यह स्वास्थ्य सेवा के पेशेवरों को एक समान भाषा प्रदान करता है जिससे वे स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं को दुनियाभर में साझा कर सकें।
इसके नए संस्करण आईसीडी-11 में गेमिंग डिसॉर्डर को स्वास्थ्य की एक गंभीर अवस्था के रूप में शामिल किया गया है। इस विकृति में निगरानी की आवश्यकता होती है।
प्रमुख तथ्य:
नए वर्गीकरण से ये समझने में मदद मिलेगी कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो लोगों को बीमार बनाती हैं और उनकी जान चली जाती है। साथ ही इससे यह भी जानने में सहायता मिलेगी कि इन बीमारियों पर कार्रवाई करके लोगों की जान कैसे बचाई जाए।
इस बार जारी किए गए आईसीडी नियमावली के नए संस्करण आइसीडी-11 को पूर्ण रूप से इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है ताकि दुनिया भर के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों तक इसकी पहुंच हो सके। साल 2019 के मई में आयोजित होने वाले विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन में आईसीडी-11 को प्रस्तुत किया जाएगा।
सदस्य देशों के द्वारा इसे अपना लेने के बाद यह जनवरी 2022 से लागू होगा। यह ना केवल डॉक्टरों बल्कि सरकारों और परिवारों को भी अधिक सतर्क करेगा और उन्हें आने वाले खतरे के प्रति सावधान करेगा।
जिससे इस विकार से पीड़ित लोगों को समुचित मदद मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। डब्लूएचओ और अन्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के मामले काफी कम हैं। यह माना जा सकता है कि दुनिया में केवल 3 फीसदी गेमर्स ही ऐसे हैं जो इस बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं।
डब्लूएचओ ने अपने दिए बयान में कहा कि दुनियाभर के लाखों गेमर्स की पहचान गेमिंग डिसॉर्डर से पीड़ितों के रूप में कभी नहीं होगी, भले ही वह गेम के प्रति अधिक अासक्त हों।
यह अवस्था ऐसे बहुत ही कम लोगो में पाई जाती है जो बलपूर्वक गेम खेलते है। संगठन के बयान में यह भी कहा गया है कि यदि कोई इस बीमारी से पीड़ित हो जाता है तो उसमें इस रोग की पहचान कोई कुशल डॉक्टर ही कर सकता है।

WHO क्या है?
WHO full form “World Health Organization” है और WHO का हिंदी में पूरा नाम विश्व स्वास्थ्य संगठनहै. World Health Organization (WHO) की स्थापना 7 April 1948 में की गईं थी इसलिए विश्व भर में 7 अप्रैल को World Health Day मनाया जाता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यू.एच.ओ) विश्व के सभी देशों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है और विश्व भर में health care से related सभी पहलुओं पर अपना ध्यान रखती है और उन्हें अच्छा करने के लिए आवश्यक काम भी करती है.
World Health Organization (WHO) की सेवाएं विश्व भर में फैली हैं. दुनिया का सबसे बड़ा ब्लड बैंक भी इन्हीं के पास है। मलेरिया, पोलियो, चेचक, हैजा, वायरल आदि कई बीमारियों को रोकने में विश्व स्वास्थ्य संगठन का विशेष योगदान रहा है.
आज अपनी सही कार्यशैली और नियंत्रण की वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन को पूरी दुनिया में सम्मान की निगाहों से देखा जाता है इसलिए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के 194 सदस्‍य हैं और भारत भी विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का एक सदस्‍य देश है जिसका मुख्‍यालय भारत की राजधानी दिल्‍ली (Delhi) में स्थित है.
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने अब तक दस प्रमुख जानलेवा बीमारियों की पहचान की है जिनमें कैंसर, सेरिब्रोवैस्क्यूलर डिजीज, एक्यूट लोअर रेस्पायरेटरी इन्फेक्शन, पेरीनेटल कंडीशंस, टी.बी., कारोनरी हार्ट डिजीज, क्रॉनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, अतिसार, डेसेन्टरी तथा एड्स या एचआईवी शामिल हैं.

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