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Artical : शांगरी ला डायलॉग और भारत


3 दिवसीय 17वीं शांगरी-ला वार्तालाप 1 जून 2018 को सिंगापुर में उद्घाटित की गयी। 17 देशों के रक्षा मंत्रियों, 40 से अधिक देशों के उच्च स्तरीय सैन्य अफ़सरों और विद्वानों समेत 6 सौ से ज्यादा लोग इस में भाग ले रहे हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वार्तालाप में प्रमुख भाषण दिया। शांगरी-ला डायलॉग में संबोधन करने वाले मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।


प्रधानमंत्री मोदी के सम्बोधन का मूल पाठ:
अपने भाषण में मोदी ने क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत के विचार और क्षेत्रीय सहयोग में भारत की भूमिका की व्याख्या की। चीन-भारत संबंध की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हम दोनों विश्व में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं और दोनों का आर्थिक विकास तेज़ है।
हमारा सहयोग बढ़ रहा है और व्यापार की वृद्धि हो रही है। हमारे पास मतभेदों का प्रबंध और नियंत्रण करने की पर्याप्त बुद्धि है। चीन और भारत की स्थिरता और दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध विश्व की शांति और विकास की कुंजी है। मुझे पक्का विश्वास है कि चीन और भारत के बीच आपसी विश्वास और सहयोग करने, एक दूसरे के मूल हितों का ख्याल करने से एशिया और विश्व का भविष्य और सुनहरा होगा।
हिंद-प्रशांत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वार्ता के माध्यम से क्षेत्र के लिए एक साझा नियम आधारित व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संगठन आसियान आने वाले समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के केंद्र में होगा। उन्होंने कहा कि आसियान देशों के साथ भारत के संबंध के ऐतिहासिक वर्ष के मौके पर यहां पहुंचकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है।
उन्होंने कहा कि परियोजनाएं निश्चित रूप से व्यापार को प्रोत्साहित करें न कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा। इस सिद्धांत पर हम किसी के साथ भी काम करने के लिए तैयार हैं।
आतंकवाद और कट्टरता जैसी बड़ी वैश्विक चुनौतियों के बारे में उन्होंने कहा कि परस्पर आश्रित समृद्धि और विफलताओं की दुनिया में कोई भी देश अपने दम पर खुद को न तो आकार दे सकता है और न ही सुरक्षित रह सकता है।

शांगरी ला डायलॉग:
शांगरी-ला वार्ता (एसएलडी) एक स्वतंत्र थिंक टैंक, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) द्वारा सालाना आयोजित "ट्रैक वन" अंतर-सरकारी सुरक्षा मंच है।
इसमें 28 एशिया-प्रशांत राज्यों के रक्षा मंत्री, मंत्रालयों के स्थायी प्रमुख और सैन्य प्रमुख भाग लेते हैं। इस फोरम का नाम सिंगापुर में स्थित शांगरी-ला होटल के नाम पर रखा गया है जहां इसे पहली बार वर्ष 2002 में आयोजित किया गया था।
इसके प्रतिभागियों में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, बर्मा (म्यांमार), कंबोडिया, कनाडा, चिली, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, जापान, लाओस, मलेशिया, मंगोलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, चीन, फिलीपींस, रूस, दक्षिण कोरिया, श्री लंका, सिंगापुर, स्वीडन, थाईलैंड, पूर्वी तिमोर, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं।


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