भारत, इंडोनेशिया के बीच 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए


भारत और इंडोनेशिया ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो के बीच 30 मई 2018 को द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के बाद रक्षा सहयोग सहित 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।


प्रमुख समझौते:
रक्षा सहयोग समझौते में नियमित द्विपक्षीय वार्ता व साझा हित के सैन्य मुद्दों व सामरिक रक्षा पर सलाह, सामरिक जानकारी का आदान-प्रदान, सैन्य शिक्षण, प्रशिक्षण व अभ्यास, सेना, नौसेना, वायुसेना व एरोस्पेस सहित सशस्त्र सेनाओं के बीच सहयोग की घोषणा की गई। इसके अलावा अन्य दूसरे क्षेत्र में मानवीय सहायता, आपदा राहत व शांति बनाए रखने व चिकित्सकीय सेवाएं शामिल हैं।

इन समझौतों का भारत-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक हितों के लिए दोनों देशों के बीच विशेष महत्व है। दोनों पक्षों ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष के इस्तेमाल व खोज में सहयोग के लिए एक कार्ययोजना समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।

समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष अंतरिक्ष विज्ञान, बाह्य अंतरिक्ष की खोज, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग, बाहरी अंतरिक्ष से पृथ्वी के पर्यावरण की निगरानी और रिमोट सेंसिंग, आपसी लाभ के लिए इंडोनेशिया के एकीकृत बायैक ग्राउंड स्टेशन का उपयोग, इंडोनेशिया में भारतीय ग्राउंड स्टेशन की स्थापना के लिए मिलकर काम करेंगे।

इसके साथ ही लापान (इंडोनेशिया का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस) निर्मित उपग्रहों की लांच सेवाओं के लिए सहयोग व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में संयुक्त शोध व विकास गतिविधियां शामिल हैं।

दोनों पक्षों ने वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग, रेलवे क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, स्वास्थ्य सहयोग और आर्थिक, व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने सहित 12 ज्ञापन समझौतों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों ने 2019-20 में कूटनीतिक संबंधों के 70 साल पूरे होने पर जश्न मनाने की गतिविधियों की एक अलग योजना पर हस्ताक्षर किए।

इंडोनेशिया के बाली और भारत के उत्तराखंड राज्यों को 'सहोदर राज्य' बनाने की भी घोषणा की गयी।

इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया वर्ष 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिये प्रयासों को दोगुना करेंगे। भारत-आसिआन साझेदारी ना सिर्फ हिन्द-प्रशांत क्षेत्र बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी शांति की गारंटी बन सकती है।


विश्व तंबाकू निषेध दिवस: 31 मई
पूरी दुनिया में तंबाकू सेवन से होने वाली समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई को मनाया जाता है।

थीम: वर्ष 2018 के लिए विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम "टोबैको एंड हार्ट डिजीज" है।

तंबाकू से समस्याएं:
तंबाकू अनेक बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। तंबाकू से निर्मित उत्पादों के सेवन से न सिर्फ व्यक्तिगत, शारीरिक और बौद्धिक नुकसान हो रहा है बल्कि समाज पर भी इसके दूरगामी आर्थिक दुष्प्रभाव दिखाई देने लगे हैं।

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (सन् 2016-17) की रिपोर्ट के अनुसार देश में 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में से लगभग 10 करोड़ लोग सिगरेट या बीड़ी का सेवन करते हैं। विश्व में तंबाकू के इस्तेमाल के कारण 70 लाख व्यक्तियों की प्रतिवर्ष मृत्यु हो जाती है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लाखों लोग तंबाकू की खेती और व्यापार से अपनी आजीविका कमाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि इन विरोधाभासों का हल कैसे संभव है।

धूम्रपान से नुकसान:
धूम्रपान के इस्तेमाल से चार हजार हानिकारक रासायनिक पदार्थ निकलते हैं, जिनमें निकोटीन और टार प्रमुख हैं। विभिन्न शोध-अध्ययनों के अनुसार लगभग 50 रासायनिक पदार्थ कैंसर उत्पन्न करने वाले पाए गए हैं।

तंबाकू सेवन और धूम्रपान के परिणामस्वरूप रक्त का संचार प्रभावित हो जाता है, ब्लड प्रेशर की समस्या का जोखिम बढ़ जाता है, सांस फूलने लगती है और नित्य क्रियाओं में अवरोध आने लगता है।

भारत में स्थिति:
भारत में सिगरेट पीने वाले लोगों का राष्ट्रीय औसत 10.7 फीसद है। यानी मोटे तौर पर कह सकते हैं कि हर 100 लोगों में 11 लोग सिगरेट पीते हैं। मिजोरम 34.4 फीसद धूम्रपान करते हैं, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।

वहीं, दक्षिण भारतीय राज्यों में सबसे ज्यादा सिगरेट पीने वाले लोगों की संख्या आंध्र प्रदेश में है। यहां सिगरेट पीने वालों का औसत 14.2 फीसद है। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दी है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि 92.4 फीसद वयस्क मानते हैं कि धूम्रपान गंभीर बीमारी का कारण बनता है। वहीं, 95.6 फीसद वयस्कों का मानना ​​है कि धुएं रहित तम्बाकू के उपयोग से भी गंभीर बीमारियां होती हैं। इसके बावजूद दैनिक धूम्रपान करने वाले सिगरेट पर औसत मासिक खर्च 1,192.5 रुपए है।

इतिहास:
इस दिवस को पहली बार 7 अप्रैल 1988 को डबल्यूएचओ की वर्षगाँठ पर मनाया गया और बाद में हर वर्ष 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की गयी। डबल्यूएचओ के सदस्य राज्यों के द्वारा वर्ष 1987 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रुप में इसका सृजन किया गया था। साल 2008 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी तंबाकू विज्ञापनों, प्रमोशन आदि पर बैन लगाने का आह्वान किया।

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