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भारत को स्मार्ट शहरीकरण की जरूरत


क्यों है चर्चा में
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 जुलाई 2018 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का दौरा किया था। पीएम मोदी ने यहां ट्रांसफॉर्मिंग अर्बन लैंडस्केप योजना की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के ज्यूपिटर हॉल में आयोजित
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बहुत जल्द ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यूपी के लखनऊ, आगरा, इलाबाद, मथुरा जैसे शहरों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के कई शहरों के स्मार्ट सिटी मिशन से जोड़ने से इन शहरों के क्राइम रेश्यो में काफी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि आज जो मकान बन रहे हैं उनमें शौचालय भी है, उज्ज्वला योजना के तहत उनमें रसोई गैस कनेक्शन है और सौभाग्य योजना के तहत उनमें एलईडी बल्ब भी लगे हैं। आवास योजना के तहत माता-बहनों के नाम पर मकान दिए जा रहे हैं। 87 लाख रजिस्ट्रियां महिलाओं के नाम की गई हैं।



क्यों जरुरत है स्मार्ट शहरीकरण की

 2030 तक शहरों की आबादी 600 मिलियन होने का अनुमान है। इसके लिए शहरों में सभी सुविधाओं से युक्त घरों की आवश्यकता होगी। दुनिया में सबसे बड़ा नियोजित शहरीकरण अभियान भारत में चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शहरी आबादी का राष्ट्रीय औसत 31 फीसदी है, जबकि यूपी में शहरी आबादी 21 फीसदी है। देश के सबसे ज्यादा 600 नगर निकाय उत्तर प्रदेश में हैं। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के दौरान 1.32 लाख घर आवास योजना के तहत बनाए जा चुके हैं ऐसे में स्मार्ट शहरीकरण की जरुरत तेजी से बढ़ रही है।



यह भी जानें
 एक अनुमाान के मुताबिक हर महीने लगभग 10 लाख भारतीय ग्रामीण और सेमिनार क्षेत्रों से शहरों में बसने आते हैं। इस कार्यक्रम में देश के 1.25 अरब नागरिकों में से लगभग 10 करोड़ लोगों को प्रभावित करने की क्षमता है । तीन साल पहले लॉन्च किया गया स्मार्ट सिटीज़ मिशन सरकार द्वारा शुरू किये गए हस्ताक्षर कार्यक्रमों में शामिल है। प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ स्मार्ट शहरों का उद्देश्य देश में सतत, समावेशी शहरी विकास और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है ।



क्या है स्मार्ट सिटीज़ मिशन
 'स्मार्ट सिटीज़ मिशन' के तहत देश में 100 ऐसे शहरों का चुनाव किया गया है, जिन्हें नागरिकों को बेहतर सहूलियतें देने के लक्ष्य से विकसित करना है । स्मार्ट सिटीज़ मिशन का मुख्य उद्देश्य उन तकनीकों का उपयोग करके शहरों को स्मार्ट बनाना है, जो शहर को स्वयं टिकाऊ बनाने, भविष्य के सबूत बनाए रखने और अपने निवासियों को सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान करने में मदद करेंगी । यदि एक वाक्य में स्मार्ट शहर का अर्थ निकाला जाए तो यह वे शहर होंगे जो नागरिकों को स्मार्ट (बुद्धिमान) शारीरिक, सामाजिक, संस्थागत और आर्थिक आधारभूत संरचना प्रदान करेंगे । स्मार्ट सिटीज़ की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :



·       कुशल परिवहन

·       ऊर्जा कुशल इमारतें

·       मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी

·       पर्याप्त पानी और बिजली आपूर्ति के साधन

·       ध्वनि प्रशासन

·       किफायती आवास परियोजनाएं

·       केंद्र सरकार करेगी मदद



चुने गए 100 स्मार्ट शहरों को केंद्र सरकार फंडिंग देगी, जिसका इस्तेमाल इन शहरों में सम्मलित और सतत विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा । देश की सभी राज्य सरकारों को स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत अपने- अपने शहरों को नामांकित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया । राज्य सरकारों ने नागरिकों और अन्य निकाइयों के साथ परामर्श कर अपने- अपने शहर को स्मार्ट बनाने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे । केंद्र सरकार ने शहरों के पिछले रिकॉर्ड और भविष्य की क्षमता के आधार पर देश भर में सौ शहरों का चुनाव किया ।


4 चरणों में होगा काम
 स्मार्ट शहरों का चुनाव 4 चरणों में किया गया है । पहले 20 शहरों की घोषणा जनवरी, 2016 को हुई थी । अभी तक देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 100 शहरों को ‘स्मार्ट सिटीज़’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की जा चुकी है । भौगोलिक क्षेत्रों के संदर्भ में, तमिलनाडु के 10 शहर, महाराष्ट्र के 8, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के 7 -7 और गुजरात के 6 शहर स्मार्ट सिटीज़ योजना में शामिल हैं ।

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